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अंकल ने मजा किया

Người đăng: Unknown on Chủ Nhật, 17 tháng 2, 2013

ये कहानी आज से करीब साल पुरानी है। ये स्टोरी मेरे अंकल की है, जो कि मेरे घर के पास ही रहते थे। मेरी उमर २३ और अंकल की उमर ३३ है। वो मेरे रियल अंकल नहीं थे सिर्फ़ मेरी फ़ैमिली को जानते थे इसलिये मैं उन्हे अंकल कहता था। हम एक दोस्त की तरह थे। हम एक साथ बी ऍफ़ देखते थे। उनका घर और हमारा घर एक ही दीवार से बना हुआ था। मेरा रूम, अंकल के रूम के ठीक बगल वाला था। उनके और मेरे रूम के बीच एक खिड़की थी। अंकल एक गर्ल्स स्कूल टीचर थे। उनके पास कई गर्ल्स टूशन के लिये आती थी। उनके पास - लड़कियां आती थी, उनमे से एक लड़की, नेहा थी। जो कि बहुत दूर से टूशन के लिये आती थी। एक दिन तेज बारिश हो रही थी सब लड़कियां अपने-अपने घर चली गईं। नेहा भी उनके साथ घर जाने के लिये निकली, पर बारिश बहुत हो रही थी इस लिये वो बापस घर में गई उसके कपड़े पूरी तरह भीग गये थे। उसे देख कर अंकल ने कहा कि बारिश रुकने के बाद चली जाना। उसने कहा ठीक है।

फिर अंकल ने उससे कहा कि तुम कपड़े चेंज कर लो। पर अंकल के पास उसके साइज़ के लड़कियों के कपड़े नहीं थे। तो अंकल ने उसे अपनी लुंगी दी और कहा कि "लुंगी को लपेट लो और मैं चाय बना लाता हूं। और अंकल किचन में चले गये। नेहा कमरे में टीवी देख रही थी। उसने लुंगी के नीचे कुछ नही पहना था। वो एकदम नंगी थी। उसके छोटे-छोटे 'दूध' लुंगी के ऊपेर से साफ़ दिख रहे थे। टीवी पर 'ऐड्स ' के बारे में जानकारी रही थी। नेहा ने ये सब पहले नहीं देखा था वो ये सब ध्यान से देखने लगी थी और उसे जोश आने लगा था वो अपने दूधों को हाथ से सहलाने लगी। इतने में अंकल चाय लेके गये।

उन्होने नेहा को देखा तो उनका " लम्बा लंड तनकर लोहे की रोड की तरह कड़ा हो गया। और लुंगी से बाहर निकलने की कोशिश करने लगा तो अंकल ने लुंगी के अंदर से ही अपनी चड्ढी उतार दी तो उनका लंड से उनकी लुंगी टेंट की तरह तन गई वो चाय लेके नेहा की तरफ़ गये तो नेहा ने पूछा सर आपकी लुंगी को क्या हो गया है। तो अंकल ने कहा कुछ नहीं। किसी को कम कपड़े में देखने पर ऐसा हो जाता है। ये कहते हुए अंकल ने उसकी लुंगी खींच दी और वो पूरी नंगी हो गई उसने कहा ये क्या कर रहे हो सर। कुछ नहीं वही जो तुम अभी कर रही थी। और अगर किसी से कहा तो एकज़ाम में फ़ैल कर दूंगा। तो वो डर गई और चुप हो गई।

अंकल उसके दूध दबाने लगे अब उसे थोड़ा- कुछ हो रहा था। वो सिसकारियां लेने लगी थी और अंकल का लंड अपने हाथ से पकड़ के सहला रही थी। अंकल उसकी चूत पे हाथ घुमा रहे थे। फिर उसकी चूत चाटने लगे उसके मुंह से आह्हह्हह्हह्हह्हह्ह इस्सस्सस्सस्सस्सस म्माज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ाआअ आआयययस जैसी अजीब सी आवाजें रही थी। अब अंकल ने उससे कहा कि वो उनका लंड अपने मुंह में लेके चूसे तो वो मना करने लगी। तब अंकल ने उसके बाल पकड़े और उसे नीचे बैठा दिया और अपना लंड उसके मुंह मुंह में घुसा दिया और अपनी कमर को धीरे से झटका देने लगे। और अपना '' लंड उसके मुंह में डाल दिया। वो अंकल के लंड को चाटने लगी। अब दोनो ६९ की पोजिशन में हो गये। अब नेहा को मजा आने लगा था और वो लंड को जोर जोर से मुंह में अन्दर बाहर करने लगी। अंकल उसकी चूत में अपनी उंगली डाल कर हिला रहे थे। १५ मिनट बाद अंकल ने अपना पानी उसके मुंह में निकाल दिया। तो नेहा ने उल्टी कर दी। और कहा कि आपने अपना लंड, मेरी चूत में तो डाला ही नहीं। अब मुझे मज़ा कैसे आयेगा। क्योंकि अब अंकल का लंड खड़ा नहीं हो रहा था। तो अंकल ने कहा तू परेशान मत हो मैं अभी आया। कह कर वो कपड़े पहन के मेरे पास आये। और मुझे सब कुछ बता दिया।

मैं चलने के लिये तैयार हो गया। मैं उनके घर पहुंचा। तो मैने नेहा को नंगा देखा तो मेरा लंड तुरन्त लोहे की तरह हो गया मैने अपने कपड़े उतार दिये और अपना " का लंड उसके मुंह में देने लगा तो वो कहने लगी कि तुम भी सर की तरह अपना पानी मेरे मुंह में तो नहीं निकालोगे? मैने कहा नहीं निकालूँगा तो वो मेरा लंड चाटने लगी मेरे लंड की टोपी एकदम लाल हो गई मैने अपना लंड उसके मुंह से निकाला और उसे बेड पर पटक दिया। उसकी दोनो टांगों को फ़ैला कर उसके पैरों के बीच में गया और अपना लंड उसकी चूत पर रख कर धक्का मारने लगा पर लंड चूत में अंदर नहीं जा रहा था।

मैने अंकल से कहा थोड़ा तेल लेकर आओ। वो तेल लेके आये तो मैने अपना पूरा लंड तेल से तर कर लिया और उसकी चूत को भी नहला दिया। मैं अपना लंड चूत पर रख के रगड़ने लगा तभी अंकल ने पीछे से जोरदार धक्का दिया तो मेरा पूरा " का लंड एक ही बार में नेहा की कुंवारी चूत में घुस गया। नेहा बहुत जोर से चिल्लाई आऐइएएएईस्सस्स तो मैने लंड बाहर निकाल कर एक जोरदार झटका मारा और दोबारा पूरा लंड चूत में डाल कर चोदने लगा। नेहा भी नीचे से उछल- कर चुदवा रही थी। उसकी चूत खून से तर हो गई थी। वो उस दिन बार झड़ी थी
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दोस्त के गर्लफ्रेंड की चुदाई

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सोनिया की चुदाई

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हेल्लो दोस्तो, मैं राजवीर एक बार फिर से हाजिर हूँ एक नई दास्ताँ लेकर ! मैंने कई कहानियाँ लिखी, कई सारे मेल आये। कुछ कहते हैं झूठ है, कुछ कहते हैं सच है। हुआ मेरे साथ है, मुझे पता है जिसको लगता है कि झूठ है तो पढ़ो और मजे लो। जिसको लगता है सच है वो तो मजे लेगा ही। लेकिन जो लिखता हूँ वो सब सच है। तो ऐसे ही मेरे शहर की एक लड़की मेरे कहानियों से खुश होकर मुझे मेल किया और कहा- मुझे आपसे दोस्ती करनी है।


मैंने जब उसके बारे में पूछा तो उसने बस अपना नाम बताया, उम्र भी नहीं बताई और कहा- बाद में बता दूँगी।
 
मेरे बारे में सब पूछा।
 
अब वो मेरे समय पर, जब मैं ऑनलाइन रहता, तब ही वो आती और मेरे से बात करती।
उसने बताया कि वो अपने माँ बाप की एकलौती बेटी है, उसके पापा रोहन 40 साल के और माँ दिव्या 38 साल की।
 
मैंने अंदाजा लगा लिया कि इसकी भी उम्र 20 से कम होगी, उसका नाम सोनिया था। सोनिया दसवीं कक्षा में पढ़ती थी। धीरे धीरे हमारी बात बढ़ने लगी, अब उसने अपना नंबर मुझे दे दिया और मेरा नंबर ले लिया। अब वो जब भी फ्री होती थी तब मेरे से बात करती थी। उसने मुझे बताया कि मेरे घर में कोई कुछ नहीं बोलता चाहे कुछ भी करूँ। हम काफी अमीर हैं, घर में नौकर-चाकर हैं। हम खूब बातें करने लगे। रात दिन सुबह 5 बजे से रात के एक-दो बजे तक।
सोनिया कहने लगी कि मुझे न नींद आती है, न भूख लगती है, न कहीं मन लगता है।
शायद उसको मुझसे प्यार हो गया था।
 
एक दिन कह ही दिया उसने मुझे- आई लव यू !
वो मेरे बारे में सारा जानती थी लेकिन मैं उसके बारे में कुछ नहीं जानता था इसलिए मैंने उससे कहा- मैं तुम्हारे बारे में कुछ नहीं जाता, फिर तुम्हें कैसे जवाब दे सकता हूँ।
उसके कहा- ठीक है, कोई नहीं, जब मिलोगे तब बता देना।
दो महीने में हम एक दूसरे के करीब आ गए। वो मेरा खूब ख्याल रखती थी, खाना खाया या नहीं, अपना ध्यान रखो, और भी बहुत कुछ !
मुझे भी अब लग रहा था कि मुझे उससे प्यार हो गया है, मैंने भी उसे प्यार का इजहार कर दिया, उसने भी हाँ कर दी। हमने एक दूसरे को अभी तक देखा नहीं है। अब हम थोड़ी थोड़ी सेक्स की बातें करने लगे। जैसे एक दिन की बात है:
सोनिया- तुम्हारा कितना बड़ा है।
मैं- मिलोगी तो अपने आप देख लेना।
सोनिया- फिर भी बता दो।
मैं- छः इंच
मैं- तुम्हारी चूची कितनी बड़ी हैं?
सोनिया- छोटी हैं, बड़ी नहीं है, निम्बू जैसी।
मैं- चूत कैसी है? बाल है वहाँ पे?
सोनिया- कसी हुई, बाल नहीं है।
सोनिया- तुम मुट्ठ मारते हो?
मैं- कभी कभी जब ज्यादा मन करता है और कोई नहीं होती।
मैं- और तुम उंगली करती हो?
सोनिया- नहीं, लेकिन रब करती हूँ कभी कभी।
मैं- मेरा लोगी?
सोनिया- हाँ जरूर ! तीनों छेदों में ! लेकिन प्यार से डालना। अभी कच्ची कलि हूँ, कुंवारी हूँ, कहीं जान न निकल जाये।
मैं- जानू, तुम तो मेरी जान हो, तुम्हारी जान कैसे निकालूँगा मैं !
उसकी सहेली भी काफी अमीर थी। मैं उसके घर गया और घंटी बजाई, उसकी नौकरानी ने दरवाजा खोला। उसकी नौकरानी करीब 25 साल की होगी। मोटे मोटे चूचे, मस्त गांड।
मैंने सोचा कि नौकरानी इतनी मस्त है तो मालकिन कैसी होगी।
उसकी नौकरानी ने मुझे अंदर बुलाया और बैठाया और कहा- छोटी मालकिन अभी आ रही हैं।
और वो मुझे बार बार घूर कर देख रही थी।
तभी दो लड़कियों के हंसने की आवाज आई। वो दोनों सीढ़ियों से आ रही थी। उसकी सहेली का नाम नेहा था, दोनों आई, एक ही उम्र 18 की होंगी।
एक ने कहा- पहचानो कौन है वो जो आपके सपनों में आती है?
वो मुस्कुरा रही थी और कभी मुझे और कभी दूसरी को देखती।
मैंने कहा- मेरे सपनों में जो आती है आज तो वो चुपचाप खड़ी है, बोल भी नहीं रही।
तभी सोनिया बोली- मैं बस देख रही थी कि तुम मुझे पहचानते हो या नहीं।
फिर नेहा सोनिया के कान में कुछ बोली और नौकरानी को जाने को बोल कर कहने लगी- मुझे कुछ काम है, मैं बाहर जा रही हूँ, 2-3 घंटे लगेंगे।
वो चली गई।
सोनिया आज क़यामत लग रही थी, लहंगा-चोली पहन रखी थी उसने, मानो ऐसा लग रहा था जैसी किसी पार्टी में जा रही हो।
वो मेरे साथ बैठ गई और बातें करने लगे। उसने अपनी उम्र 18 साल बताई। मैंने उससे कहा- यार तुम मेरे से 2 साल छोटी हो।
सोनिया ने कहा- प्यार उम्र नहीं देखता। मैं इसलिए मिलने से मना कर रही थी लेकिन तुम ही जिद कर रहे थे। अब तुम मेरे से प्यार करो या मत करो लेकिन मैं तुमसे ही प्यार करती रहूँगी।
इतना कहते ही उसने अपने होंठ मेरे होंठों से लगा दिए और चुम्बन करने लगी। मैं इसके लिए तैयार नहीं था लेकिन थोड़ी देर में मुझे भी मजा आने लगा और मैं भी साथ देने लगा था पर मैं यह सब अभी नहीं करना चाहता था, मैं उससे प्यार करने लगा था, सेक्स के बारे में तो कभी सोचा ही नहीं। मैंने उससे प्यार किया था उसके बदन से नहीं !
 
जबकि उस समय वो ऐसी लग रही थी मानो स्वर्ग से आई हो, किसी की भी नीयत उस वक्त ख़राब हो सकती थी उस पे। मैंने उसे रोकना चाहा, उसे अपने से अलग किया और कहा- यह ठीक नहीं है।
इतना सुनते ही उसने मेरा हाथ पकड़ा और कमरे में ले गई और कमरा बंद किया, मुझे बिस्तर पर धक्का दिया, बिस्तर फूलों से सजाया हुआ था और अपने कपड़े उतारने लगी और थोड़ी ही देर में नंगी हो गई, आकर मेरे से चिपक गई, बेहिसाब चूमने लगी।
आखिर मैं भी इंसान हूँ, कब तक सब्र करता, मेरा भी सब्र का बाँध टूट गया, मैं भी अब उसका साथ देने लगा।
उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए, मैं भी उसके सामने बिल्कुल नंगा था, मैं उसकी चूची चूस रहा था जो सच में निम्बू जैसी ही थी, कभी दाईं चूची, कभी बायीं चूची।
मैं धीरे धीरे नीचे आया जहाँ चूत होती है और चूत चाटने लगा। एकदम साफ़ और गुलाबी चूत जिस पर एक भी बाल नहीं था। सोनिया सिसकारियाँ ले रही थी, मुझे भी मजा आ रहा था।इसी बीच सोनिया झर गई। अब मेरे लंड को पास से देखते ही बोली- यार, ये क्या मेरे में चला जायेगा/
मैंने कहा- मुँह में डाल कर दखो, अगर मुँह में चला जायेगा तो चूत में भी चला जायेगा।
इतना कहने पर वो मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी। कभी मुँह में रख कर टाफी की तरफ चूसती तो कभी आगे पीछे करके चूसती, तो कभी गोलियों को चूसती। मुझे खूब मजा आ रहा था, मैं झरने वाला था, उससे पूछा- कहाँ लोगी मेरा माल? मुँह में या बदन पे?
उसने कहा- स्वाद तो ले के देखने दो कि कैसा लगता है।
और मेरा पूरा माल अंदर ले गई। वो बाहर गई और रसोई से दो बीअर ले आई। दोनों ने बैठ कर बीयर पी, उसने आधी बोतल, मैंने डेढ़ बोतल।
दोनों को हल्का सा सरूर छा गया, हम एक दूसरे को चूमने लगे।
मैं फिर उसकी चूत चाटने लगा, कुछ देर बाद वो मेरा लंड चूसने लगी।
अब उसने कहा- अब नहीं रहा जाता, डाल दो अपना सांप मेरे बिल में !
मैंने थोड़ा तेल लगाया अपने लंड पर और उसकी चूत में !
 
एक-दो बार धक्के दिए, पर अंदर नहीं गया। उसकी चूत उम्र के हिसाब से कसी थी। फिर मैंने उसे जोर से पकड़ कर एक धक्का दिया, आधा लंड अंदर चला गया।
वो बहुत तेज चिल्लाई, उसकी चूत से खून की धारा बहने लगी और आँखों से आँसुओं की धारा !
मैंने अपना हाथ उसके मुँह पर रख दिया और उसे चूमने लगा, उसकी चूची चूसने लगा, सहलाने लगा।
जब थोड़ा आराम हुआ तो मैंने एक और धक्का दिया और पूरा सांप बिल में ! पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया, उसकी सांस एकदम रुक सी गई।
मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रखे और चूमने लगा। कुछ देर बाद वो नीचे से गांड हिलाने लगी तब मैंने भी उसका साथ देना शुरू किया और आगे-पीछे होने लगा।
फिर 15 मिनट तक लंड और चूत की लड़ाई होती रही और चूत लंड के सामने पानी पानी हो गई और लंड ने एक बौछार चूत में फेंक दी और चूत उसकी दीवानी हो गई।
हम दोनों आराम से पड़े हुए थे, सोनिया उठी और बिस्तर और अपने आप को देख कर घबरा गई। उसकी गांड-चूत खून से सनी हुई थी और बिस्तर भी।
मैंने उसे बताया- पहली बार होता है, बाद में सब ठीक हो जाता है।
उसे चलने में दिक्कत हो रही थी। फिर हम नहाये, कपड़े पहने और बाहर गए, होटल में खाना खाया, मूवी देखी, खूब घूमे और फिर आ गए वही चोदा-चादी का खेल खेलने।
तब नेहा घर पर ही आ चुकी थी, हमारी सारी आवाजे उसको सुनाई दे रही थी।
उसके बाद हमें जब भी मौका मिला, मजे किये, गांड-चूत में हमने ऐसी कोई जगह नहीं जहाँ हमने एक दूसरे को छोड़ा हो। उसको सेक्स का भूत सवार हो गया था, हफ्ते में दो बार उसको सेक्स करना ही है और वो भी मेरे साथ, कहती है किसी का ख्याल मैं आज तक अपने दिल में नहीं लाई।
वो मुझ से सच में प्यार करने लगी थी उसकी कोई सेक्स की भूख नहीं थी, सेक्स तो शरीर की जरुरत है।
मैं उसे कहता- प्यार सेक्स से बड़ी चीज है, प्यार जिंदगी भर क्या, सदियों का होता है और सेक्स दो पल का मजा।
मैं भी उसे बहुत प्यार करता था लेकिन एक दिन उसका एक्सीडेंट हो गया और वो मुझे छोड़ कर चली गई।
लेकिन उसकी याद अभी भी मेरे दिल में बसी हुई है।
 
 
आई मिस यू सोनिया !
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जब मैं पुजारी से चुदबाई

Người đăng: Unknown

उस समय की बात है जब मेरी उम्र सिर्फ़ 18 साल थी। मेरे घर से कुछ ही दूरी पर एक छोटा सा मन्दिर था। मन्दिर में नया पुजारी आया हुआ था। वह अपने को बाल ब्रह्मचारी कहता था, करीब 40 साल का था। देखने में सांवला मगर शरीर कसा हुआ था।



मैं हफ़्ते में 3-4 बार मन्दिर जाया करती थी। मन्दिर में वह मुझे घूर घूर कर सेक्सी निगाह से देखा करता था। मुझे उसके नियत पर शक होने लगा था। मगर मन ही मन मुझे अच्छा लगता था।
एक दिन मैं बहुत सुबह ही मन्दिर पहुँच गई थी। वहाँ पहुँचने पर देखा कि पुजारी नहा रहा है।
वह मेरी तरफ़ देखकर मुस्कुरा दिया और रुकने के लिये इशारा किया। वह खुले में नल के नीचे नहा रहा था। उसका कस्सा हुआ बदन बहुत अच्छा लग रहा था। उसने पतली सफ़ेद धोती पहन रखी थी। मैं तिरछी नज़र से उसे देख रही थी, शायद उसे पता चल गया था कि मैं उसे देख रही हूँ।
गीली धोती से उसका लण्ड साफ़ दिख रहा था, काफ़ी मोटा और लम्बा था। इतना मोटा लण्ड मैंने पहले कभी नहीं देखा था। वह अब कपड़े बदलने लगा था। कपड़े बदल कर वह मेरे पास आ गया और बोला- चलो, अब तुम्हें पूजा कराते हैं।
पूजा के बाद उसने धीरे से कहा- तुम बहुत सुन्दर हो।
मैंने कहा- पुजारी जी, आप तो बाल ब्रह्मचारी हो, आपको ऐसी बात शोभा नहीं देती।
तब उसने कहने लगा- हाँ, यह सब तो ठीक है मगर मेरा भी तो मन ही है, कभी कभी बहक जाता है। अच्छा, यह बताओ कि जब मैं नहा रहा था तो तुम क्या देख रही थी?
मैं थोड़ी शरमा गई मगर हिम्मत करके बोली- कुछ नहीं पुजारीजी, मैं आपका शरीर देख रही थी और कुछ नहीं।
पुजारी मुस्कुरा कर बोला- और कुछ नहीं? तो बोलो मेरा शरीर और वो कैसा लगा?
मैंने कहा- पुजारीजी, आपका शरीर और वो बहुत भयंकर है, मुझे आपसे डर लगता है। आप तो बड़े खिलाड़ी लगते हैं।
इस पर वो बोला- अरे चलो, थोड़ी बातें करते हैं, अभी कोई नहीं है।
और हम दोनों बैठ गये।
पुजारीजी मेरे स्तन को देख कर बोले- ये तो काफ़ी बड़े हो गए हैं। मन करता है कि मसल दूँ।
तब मैंने कहा- लगता है आप बाल ब्रह्मचारी के नाम पर बहुत मजे कर चुके हो। आप तो बहुत खराब आदमी लगते हो। मैं आपके बारे में सबको बता दूँगी।
पुजारी कुछ डर गया और कहने लगा- प्लीज ऐसा मत करना। मैं तुम्हें कुछ नही करुंगा। प्लीज अपना नाम तो बता दो।
मैंने कहा- मुझे लोग रीता कहते हैं। अच्छा ठीक है, नहीं बताऊँगी। लेकिन मैं कल शाम में फ़िर आऊँगी और आपसे और बातें करुंगी।
और मैं मु्स्कुरा कर चल दी।
दूसरे दिन करीब 7 बजे शाम को मैं मन्दिर गई तो देखा कि पुजारीजी अकेले बैठे हुए हैं। मैंने पूछा- अरे पुजारीजी आज कुछ चिन्तित लग रहे हो?
उस समय अन्धेरा हो चुका था, मैने उनके गाल पकड़ कर दबा दिए। तब जाकर वे मुस्कुराए और मेरा हाथ पकड़ कर कहने लगे- अरे रीता, मैं तो डर गया था कि तुम मुझसे गुस्साई हुई हो। पुजारीजी मेरा हाथ पकड़ कर कमरे में ले गये और कहने लगे- आज यहाँ कोई नहीं आने वाला है।
कमरे में बहुत धीमी रोशनी थी। पुजारी जी अपनी बनियान निकाल दी। अब मैं उनकी छाती पर हाथ रख कर सहलाने लगी। उन्होंने मेरा एक हाथ पकड़ कर अपने लिंग पर रख दिया। उनका लिंग पूरी तरह तन चुका था। उनका लिंग पकड़ते ही मैं डर गई- अरे बाबा ! यह तो घोड़े के लण्ड जैसा है। आप पहले यह बताओ कि आप कितनियों के साथ यह कर चुके हो?
पुजारीजी बोले- अरे रीता, बस तुम दूसरी हो। इससे पहले एक 40 साल की औरत को चोदा था। वह विधवा थी।
मैंने कहा- पुजारी जी, मैं तो कुंवारी हूँ, मेरी तो सील भी नहीं टूटी है, मैं तो मर जाऊँगी। तुम्हारा लण्ड बहुत बड़ा है।
पुजारीजी ढाढस देते हुए मुझे चूमने लगे और मेरी चोली के बटन खोल कर मेरे स्तन चूसने लगे। उसके बाद मेरा लहंगा भी उतार दिया। अब मैं पूरी तरह नंगी हो चुकी थी।
पुजारीजी मेरे ऊपर चढ़ कर अपनी लिंग को मेरे मुख में डालने लगे और खुद मेरी बुर चाटने लगे। मेरी बुर को उंगली से खोल कर अन्दर अपनी जीभ डाल कर चाट रहे थे।
अब मुझे मजा आने लगा था। इधर पुजारीजी ने अपना लण्ड मेरे मुँह में अन्दर तक कर दिया था, मुझे भी उनका लण्ड चूसने में मजा आ रहा था।
अब वे जोर जोर से चाटने लगे थे और अपनी दोनों जान्घो से मेरे गर्दन को दबा कर अपने लण्ड को मेरे कंठ तक ठेल चुके थे।
उसी समय मुझे नमकीन सा स्वाद आने लगा। मैंने उनको हटाना चाहा मगर सफ़ल नहीं हो पाई।
कुछ देर के बाद वे उतर गये और सॉरी बोलने लगे- रीता, मुझे माफ़ कर दो, मैं नहीं सह पाया। मैं दिखावटी गुस्सा करने लगी। मैं घर जाने के लिये कहने लगी। पुजारी जी मेरे स्तन सहलाने लगे और कुछ देर और रुकने के लिये कहने लगे। बिना कुछ बोले मैं लेटी रही।
करीब 10 मिनट के बाद पुजारीजी ने मेरे हाथ में अपना लण्ड पकड़ा दिया।
फ़िर से उनका लण्ड खड़ा देख मुझे आश्चर्य होने लगा, मैंने कहा- पुजारीजी, अब जाने दीजिए, आपका तो गिर ही गया न, मैं आपके लण्ड को नहीं झेल पाऊँगी।
तब पुजारीजी बोले- अरे रीता, असली मज़ा लिये बिना कैसे चली जाओगी। मैं बहुत धीरे से अन्दर करुंगा, अगर अधिक दुखे तो बोल देना, मैं रुक जाऊँगा।
उसके बाद मेरी दोनों जांघों के बीच में बैठ कर अपने लण्ड से मेरी बुर को सहलाने लगे, भगनासा को लिंग के मुण्ड से रगड़ने लगे। मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी थी, मैंने उनके लण्ड को पकड़ अपनी आँखें मूंद ली।
वे मेरी दोनों टांगों को अपने दोनों कन्धों पर रख कर अपने टनटनाए हुए 8 इन्च के लण्ड को मेरी बुर के अन्दर धकलने लगे। 2 इन्च भी नहीं गया होगा कि मैं रुकने को बोलने लगी। मैंने अपने हाथ से उनका लण्ड पकड़ लिया और कहने लगा- पुजारी जी, बहुत दुख़ रहा है जरा धीरे से कीजिए, बहुत मोटा है आपका, मेरी फ़ट जाएगी।
तब कुछ रुक कर फ़िर अन्दर ठेलने लगे और मेरे होंठ चूमने लगे। वे मुझे सान्त्वना दे रहे थे, कह रहे थे- मेरी रानी आज तुझे पूरी औरत बनाना है। तुम्हारी बुर का छिद्र बहुत संकरा है, आज तुम्हारी सील भी तोड़नी है इसलिए आज तो सहना ही पड़ेगा, लेकिन अन्दर जाते ही मज़ा आ जाएगा।
"अच्छा बाबा, ठीक है, मगर बहुत आहिस्ते आहिस्ते कीजिए !" मैंने कहा।
उसके बाद कुछ और अन्दर करके धीरे से धक्का देने लगे और मेरे स्तन को चूसने लगे।
मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, मैंने अपने हाथ लण्ड से हटा कर उनके कमर पर रख दिए और अन्दर करने का इशारा किया। वे रूमाल मेरे मुख पर रख कर बोले- रानी मत रोना, बस एक बार सह जाना।
मुझे डर भी लग रहा था और पूरा लण्ड भी लेना चाहती थी। मैंने अपनी आँखें बन्द कर ली। बस उसी वक्त जोर का दर्द हुआ और मैं जोर से चिल्ला उठी- अरे, मैं मर गई ! जल्दी निकालो, मेरी फ़ट गई !
मेरी आँखों से आँसू आ गये लेकिन वे पूरी तरह से मुझे जकड़े हुए थे और धीरे से धक्के मारने लगे।
कुछ देर के बाद दर्द कम हुआ तो मैं बोली- अरे बाप रे ! दर्द के मारे मेरी जान ही निकल गई।
पुजारीजी कहने लगे- अब कैसा लग रहा है? मज़ा आ रहा है न?
मै कुछ न बोली और उनकी कमर पकड़े रही। कुछ देर के बाद पुजारी ने बाहर निकाल कर अपने लण्ड पर निरोध लगाया और फ़िर से मेरे बुर में अपना लण्ड डाल दिया। इस बार कम दुखा और मैं चुप रही।
अब वे फ़िर से धक्का देने लगे और मैं दर्द के साथ चुदाई का मज़ा लेने लगी। चुदाई खत्म होने के बाद देखा तो बिस्तर पर खून ही खून था, मेरी चूत की झिल्ली फ़ट चुकी थी।
मैं पुजारी जी से कहने लगी- आपका लण्ड तो बहुत ही खतरनाक है, मेरी तो फ़ाड ही दी आपने, अब मैं अपनी पति को क्या दूंगी?
इस पर वे बोले- अरे मैंने तुम्हारे पति का काम आसान कर दिया है। तुम्हारी बुर बहुत ही तंग है, मेरा भी लण्ड छिल गया है।
देखा तो पुजारी का लण्ड भी पूरी तरह लहुलुहान हो गया था।
इसके बाद मैंने अपने कपड़े पहने और घर आ गई।
इसके बाद मैं पुजारी से कभी नहीं मिल पाई और कुछ ही दिनों के बाद मेरी शादी हो गई।
सुहागरात में तो मुझे डर ही लग रहा था कि कहीं उन्हें शंका न हो जाए मगर इनका लण्ड तो और भी बड़ा था। जब इन्होंने अपना लण्ड अन्दर करना चाहा तो मैंने अपनी जांघें भींच ली ताकि इन्हें मेरी बुर एकदम कसी लगे और हुआ भी ऐसा ही।
वे बोल रहे थे- तुम्हारी तो बहुत ही कसी हुई है।
और मैं दर्द होने का बहाना कर रही थी।
बाद में देखा तो उनका भी लण्ड छिल चुका था मगर मेरी बुर से खून नहीं आया था। उस रात मेरे पति ने मुझे तीन बार चोदा।
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